शब्द ही प्यार है। शब्द ही उपहार है। :- डॉ. अशोक वासलवार

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शब्द ही प्यार है।
शब्द ही उपहार है।
शब्द ही शक्ति है ।
शब्द ही भक्ति है।
शब्द ही वैरी है।
शब्द ही छुरी है।
शब्द ना होते तो हम कहाँ होते।
शब्द ना होते तो तुम कहाँ होते।
शब्दो से ही याराना है।
शब्दो से ही विराना है।
शब्दो से ही पलकें ज़ुकती है।
शब्दो से ही पलके क्रोधी है।
शब्द मुलायम भी है।
शब्द कठोर भी है।
शब्द अनमोल है।
शब्द परिमोल भी है।
शब्दो से दुनिया उभरी है।
शब्दो से दुनिया गिरी भी है।
चार इंच की जुबां क्या क्या करती है।कभी उठाती है,कभी गिराती भी है।
डॉ, अशोक वासलवार